अजमेर: पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदू जनसंख्या और धर्मांतरण पर दिया बड़ा बयान
Ajmer: Pandit Dhirendra Shastri made a major
अजमेर: अपने बेबाक अंदाज और 'हिंदू राष्ट्र' की संकल्पना के लिए चर्चित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर राजस्थान की वीर धरा से हुंकार भरी है। अजमेर में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने हिंदुओं की घटती जनसंख्या, धर्मांतरण और युवाओं के भटकाव पर सीधे और तीखे शब्दों में अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत में हिंदुओं का कम होना एक वैश्विक चिंता का विषय है।
'दो नहीं, चार बच्चे चाहिए' धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान
अजमेर दौरे पर बाबा बागेश्वर ने जनसंख्या संतुलन को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारत में हिंदुओं की घटती संख्या और बढ़ता मजहबी प्रभाव देश को बर्बादी की ओर ले जा रहा है। अगर सनातन को सुरक्षित रखना है, तो हर हिंदू को कम से कम 4 बच्चे पैदा करने चाहिए। शास्त्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि अभी उनकी शादी नहीं हुई है, लेकिन विवाह होने के बाद वे खुद भी हिंदुओं की आबादी बढ़ाने में अपना योगदान देंगे।
धर्मांतरण पर प्रहार और 'अमर अकबर एंथनी' का जिक्र
धर्मांतरण के मुद्दे पर बोलते हुए शास्त्री ने कहा कि हिंदुओं को अपने धर्म पर गर्व करना होगा। उन्होंने 'घर वापसी' पर जोर देते हुए फिल्म अमर अकबर एंथनी का उदाहरण दिया और कहा कि जैसे फिल्म के अंत में तीनों का बाप 'कन्हैयालाल' निकलता है, वैसे ही अगर लोगों को समझ आ जाए कि उनके पूर्वज हिंदू थे, तो घर वापसी स्वतः ही हो जाएगी।
धर्मांतरण रोकने के लिए शास्त्री ने दी तीन बड़ी सलाह
- शिक्षा: अशिक्षा को दूर करने के लिए शिक्षा की जरूरत है।
- भक्ति: अंधविश्वास मिटाने के लिए भगवत भक्ति जरूरी है।
- सहयोग: आर्थिक तंगी दूर करने के लिए अमीर हिंदुओं को गरीब हिंदुओं का सहारा बनना होगा।
इंस्टाग्राम रील बनाने वालों को नसीहत
धीरेंद्र शास्त्री ने युवाओं, विशेषकर बेटियों को सोशल मीडिया के भटकाव से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इंस्टाग्राम पर नाचने वाली रील बनाने के बजाय बेटियों को आईएएस, आईपीएस, दुर्गा और काली बनना चाहिए। उन्होंने सनातनी परंपराओं को छोड़कर दूसरी संस्कृतियों के अंधानुकरण को गलत बताया।वीडियो संदेश के माध्यम से उन्होंने गीता के श्लोक 'स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः' का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अपने ही धर्म में जीना और मरना उचित है, दूसरों के मजहब और उनकी सेवाओं को उन पर छोड़ देना चाहिए। अजमेर में बाबा के दिव्य दरबार को सुनने के लिए राजस्थान के कोने-कोने से हजारों श्रद्धालु उमड़े। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।